स्वतन्त्र भारत का यह सपना था कि देश चलार्थ मुद्रा कागज़ के वर्षों से हो रहे
आयात के भार से मुक्त हो, राष्ट्र की चलार्थ एवं बैंक नोट कागज़ के उत्पादन
में स्वाव्लम्बन एवं कागज़ के आयात में हो रही विदेशी मुद्रा की बचत के
उद्देश्य से साठ के दशक के शुरुआती वर्षों में ही प्रतिभूति कागज़ कारखाना की
स्वप्निल परियोजना साकार हुई । किसी भी कागज़ उद्योग की पूर्वाप्रेक्षित
आवश्यक्ताऒं जैसे भूमि, जल, विद्युत, परिवहन एवं मानव शक्ति आदि को ध्यान में
रखते हुए होशंगाबाद को सर्वाधिक उपयक्त विकल्प मानकर चुना गया । कारखाने के
भवन का अभिकल्पन तथा निर्माण कार्य केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग ने सन
१९६२में प्रारम्भ किया । कारखाने के ५०० मीटर लम्बे एवं ५०
मीटर चौड़े मुख्य भवन का कार्य दिनांक २८ अक्टूबर १९६३ को शुरू हुआ । इस भवन
का पश्चिमी भाग दो मंजिला और शेष हिस्सा एक मंजिला बनाया गया है । कागज़
निर्माण करने वाली पहली दो मशीनों के प्रथम युग्म की स्थापना का कार्य २७ जून
१९६७ को पूर्ण हुआ जबकि मशीन क्रमांक ३ एवं ४ के दूसरे जो़डे की स्थापना २७
नवंबर १९६७ को पूरी हुई । कारखाने का औपचारिक रूप से उद्घाटन एवं राष्ट्र के
नाम समर्पण ९ मार्च १९६७ को तत्कालीन उप प्रधानमन्त्री श्री मोरारजी देसाई जी
द्वारा किया गया ।